Monday, September 1, 2008

साधना

  1. साधना एक पराक्रम है, संघर्ष है, जो अपनी ही दुष्प्रवृत्तियों से करना होता है।
  2. दैवी शक्तियों के अवतरण के लिए पहली शर्त है- साधक की पात्रता, पवित्रता और प्रामाणिकता।
  3. सज्जनों की कोई भी साधना कठिनाइयों में से होकरनिकलने पर ही पूर्णहोती है।
  4. असत से सत् की ओर, अंधकार से आलोक की और विनाश से विकास की ओर बढ़ने का नाम ही साधना है
  5. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् (कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल में कभी भी नहीं ) गीता
  6. असतो मा सदगमय ।। तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्मामृतम् गमय (हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो ।। मृत्यु से अमरता की ओर लेचलो ॥।
  7. एक साधना जिसे करने के लिए हम आपको अनुरोधपूर्वक प्रेरित करते हैं-वह हैं दिन-रात में से कोई भी पन्द्रहमिनट का समय निकाले और एकान्त में शान्तिपूर्वक सोचे कि वे क्या हैं ? वे सोचे कि क्या वे उस कर्तव्य को पूराकर रहे हैं, जो मनुष्य होने के नाते उन्हे सौपा गया था। मन से कहिए कि वह निर्भीक सत्यवक्ता की तरह आपके अवगुण साफ-साफ बतावें।
  8. ईश्वर का अनुग्रह प्राप्त करने का एकमात्र उपाय हैं - साधना।
  9. सिद्ध सरहपा के अनुसार ध्यान की सिद्धि को परखने के निम्न मानदण्ड बताये हैं। (1) आहार संयम (2) वाणी कासंयम (3) जागरुकता (4) दौर्मनस्य (द्वेष) का होना (5) दु: का अभाव (6) श्वासों की संख्या में कमी हो जानासंवेदनशीलता उक्त सात मानदण्डो से कोई भी साधक कभी भी अपने को जांच सकता हैं कि उसकीध्यान-साधना कितनी परिपक्व और प्रगाढ हो रहीं है।
  10. विवाह एक आध्यात्मिक साधना हैं। यह एक ऐसी प्रेम वल्लरी हैं जिसका अभिसिंचन त्याग और उत्सर्ग की उच्चभावना से किया जाता है।
  11. चिन्तन में उपासना, चरित्र में साधना और व्यवहार में आराधना का समावेश करने में पूरी-पूरी सतर्कता औरतत्परता बरती जाये।
  12. जिस दिन आत्मा को परमात्मा का बोध हो जाये उस दिन आपकी साधना फलितार्थ हो जायेगी।
  13. पुस्तकों का अध्ययन ऐसी साधना हैं, जिससे मनुष्य अपने अन्तबाह्य जीवन का पर्याप्त विकास कर सकता है।
  14. पूज्य गुरुदेव गायत्री महामंत्र के माध्यम से ऋतम्भरा प्रज्ञा और वर्चस की साधना करते थें। इन होनो ही तत्वों कोवे अपने आत्मदेवता में समाविष्ट मानते थें। उनका मत था कि जिसने अन्त:करण को तपोवन बना लिया वहॉएकनिष्ठ होकर ब्रह्मचेतना से तादातम्य स्थापित करने का प्रयास किया वही सच्चा साधक है।
  15. श्रद्धा, विश्वास, साहस, धेर्य , एकाग्रता, स्थिरता, दृढता और संकल्प ही वे तत्व हैं, जिनके आधार पर साधनाएंसफल होती है।
  16. श्रेष्ठ विचारों के चिन्तन-मनन की साधना वस्तुत: मस्तिष्कीय क्षैत्र में घुसे मनोविकारों को, दुष्प्रवृतियों को निरस्तकरने के लिये लड़ा जाने वाला महाभारत हैं। जो इसमें सफल होते हैं, वे ही सच्चे अर्थो में जीवन का आनन्द उठातेहुए आत्मोत्कर्ष का परम लाभ प्राप्त करते हैं।
  17. शब्द से नि:शब्द में छलांग लगाने का साहस ही साधना है।
  18. ज्ञानयज्ञ इस युगका सबसे बडा यज्ञ हैं। ज्ञानदान से बढकर आज की परिस्थितियों में और कोई दान नही। ज्ञानसाधना ही इस युग की सबसे बडी साधना है।
  19. सबसे विकट तपोवन अपना अन्त:करण ही हैं, यही एकनिष्ठ होकर ब्रह्मचेतना में तादातम्य स्थापित करने का जोप्रयत्न किया जाता हैं, वही सच्ची साधना है।
  20. साधन हमारे बहिरंग जीवन को सम्पन्न बनातें हैं, साधना हमारे अन्तरंग जीवन को पवित्र बनाती है।
  21. साधना की सीढियॉ हैं-उपासना, आत्मशोधन, परमार्थ।
  22. साधना का अर्थ है-अपने को अनगढ से सुगढ बनाना।
  23. साधना हमारे अन्तरंग जीवन को पवित्र बनाने की कला है।
  24. साधना हमें सकारात्मक रचनात्मक बनाती है।
  25. सादा जीवन-उच्च विचार आत्मवादी की प्रथम साधना है।
  26. सद्ञान की उपासना का नाम ही गायत्री साधना है।
  27. स्वाध्याय युक्त साधना से ही परमात्मा का साक्षात्कार होता है।
  28. उपासना शरीर हैं, साधना प्राण हैं।
  29. उपासना और साधना का फलितार्थ अराधना में होता हैं। आराधना स्वयं को व्यापक बनाने, विराट पुरुष से स्वयं कोएकात्म करने की कला है।
  30. देवत्व साधना से मिलता है।
  31. व्यक्तित्व के आयामों को समझना, उन्हे प्रकाशवान बनाना ही तो जीवन-साधना की डगर पर पहला कदम है।
  32. व्यवहार से ही मनुष्य के व्यक्तित्व की गहरी परतें अभिव्यक्त होती हैं। इसे सर्वथा अपनी जीवन साधना की मर्यादाएवं गरिमा के अनुरुप होना चाहिये।
  33. तप की शक्ति प्रचण्ड हैं, उसके बल पर ही अध्यात्म जगत के सारे काम चलते है। तप की पूंजी जहॉं हो, वहॉ उतनीही विजय मिलेगी। तप के बिना केवल बाहृ साधनो से कोई बडी सफलता प्राप्त नही की जा सकती।
  34. जीवन साधना का अर्थ हैं-अपने समय, श्रम और साधनों का कण-कण उपयोंग करना।
  35. जीवन साधना नकद धर्म हैं। इसके प्रतिफल के लिये लम्बी प्रतीक्षा नहीं करनी पडती।
  36. जीवन-साधना का अर्थ हैं- अपने गुण, कर्म, स्वभाव को साध लेना।
  37. जो जीवन साधना की डगर पर चलने के लिये उत्सुक एवं इच्छुक हैं, उन्हे अपने पहनावे के प्रति जागरुक होनाचाहिये।
  38. अध्ययन से थोडा ज्ञान ही होगा लेकिन साधना से समग्र ज्ञान हो जाता है।
  39. अपना आन्तरिक स्तर परिष्कृत करना ही सर्वश्रेष्ठ तप-साधना है।
  40. अपने गुण कर्म स्वभाव का शोधन और जीवन विकास के उच्च गुणों का अभ्यास करना ही साधना है।
  41. आध्यात्मिक साधनाएं बरगद के वृक्ष की तरह घीरे-धीरे बढती हैं, पर से होती टिकाउ है।
  42. अन्त:करण की सुन्दरता साधना से बढती है।
  43. अन्त:करण को कषाय-कल्मषों की भयानक व्याधियों से साधना की औषधि ही मुक्त कर सकती है।
  44. गायत्री साधना मात्र जीभ से मंत्रोच्चारण करने से नहीं, महानता के आदर्शो को जीवन-यात्रा का एक अंग बनाने परसम्पन्न होती हैं। इसके लिए जहॉ व्यक्ति का चिन्तन सही रखने के लिए आहार सही होना जरुरी हैं, वहीं श्रेष्ठविचारों को आमिन्त्रत करने की कला भी उसे सीखनी होगी, तभी ध्यान सफल होगा।
  45. ब्रह्मवर्चस का अर्थ है-ब्रह्म विद्या व्यावहारिक तप साधना का समन्वय, अध्यात्म तथा विज्ञान का समन्वय, सिद्धान्त व्यवहार का समन्वय।
  46. ब्राह्मण जन्म से नहीं जीवन-साधना से बना करते है।
  47. मधुर वचन बोलना व्यक्तित्व की गरिमा बढाने वाली साधना हैं।
  48. धेर्य साधना क्षेत्र में अति अनिवार्य है।

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